But for Why????? (HI)

आपने ना कहा... और यह गलत लगा


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यह कोई नाटकीय क्षण नहीं था। बस एक साधारण सा पल, जब कुछ कहने के लिए रुके। “नहीं।” यह शब्द हल्के से निकला, लेकिन इसके अंदर एक गहरी आवाज़ थी। आपके अंदर की थकान, जो चुप्पी में बसी थी, अचानक सामने आई। जैसे कोई अनदेखा बोझ थोड़ा हल्का हुआ हो।

लेकिन राहत की जगह एक अजीब सी असुविधा ने ले ली। जैसे आपने अपने भीतर के किसी हिस्से को अनजाने ही जागृत कर दिया हो। वो हिस्सा जो सवाल पूछता है, जो संकोच करता है। उस चेहरे के भाव, उस पल का ठहराव, सब कुछ आपके अंदर गुंजायमान होता है।

आप खुद को समझाने लगते हैं, अपनी सीमाओं के लिए एक तर्क खोजते हैं। “मैं overwhelmed हूँ।” लेकिन यह तर्क भी एक अजीब सी बेचैनी छोड़ जाता है। जैसे यह पहली बार है जब आपने अपने लिए खड़े होने की कोशिश की।

अब, वहाँ एक खाली जगह है जहाँ पहले बोझ था। लेकिन इसके साथ एक अनिश्चितता भी है। कुछ बदल गया है, पर क्या यह बदलाव सही है या नहीं, यह समय ही बताएगा। एक हिस्सा चाहता है कि सब पहले जैसा हो जाए, लेकिन दूसरा हिस्सा जानता है कि कुछ नया उभरा है। कुछ ऐसा जो अज्ञात है, और जिसके साथ अभी रहना सीखना है।

यह पॉडकास्ट व्यक्तिगत कहानियाँ और आत्मचिंतन साझा करता है, न कि पेशेवर मार्गदर्शन। यदि आप किसी कठिन समय से गुजर रहे हैं या सहायता की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं, तो किसी योग्य विशेषज्ञ से संपर्क करना मददगार हो सकता है।

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But for Why????? (HI)By Quiet Door Studios