इतिहास गवाह है कि विश्व के विकास में श्रमिकों का योगदान अभूतपूर्व है। पर उनका स्वयं का जीवन का स्तर कुछ और ही तस्वीर बयां करता है। भारत में इन श्रमिकों की कहानियां और भी दयनीय है। विषय और अधिकारों के चल रहे घमासान में मजदूर दूर दूर तक नज़र नहीं आता। वक्त है चिंतन और मंथन के विषय और नज़रिए में हम उस मजदूर को भी शामिल करें।
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