
Sign up to save your podcasts
Or


आध्यात्मिक पथ के बारे में आम धारणा यह है कि इसका अनुसरण
एक बच्चे को एक बूढ़े व्यक्ति की तुलना में अधिक नींद की जरूरत होती है। भोजन के संबंध में हमारी आवश्यकताएं दिन की शारीरिक गतिविधियों के आधार पर भिन्न हो सकती हैं, यह दर्शाता है कि ‘यथायोग्य’ का अर्थ वर्तमान क्षण में जागरूक होना है। इसे पहले करने योग्य कर्म (6.1) या नियत कर्म (3.8) के रूप में संदर्भित किया गया था।
हमारा दिमाग अपनी कल्पना से साधारण तथ्यों को बढ़ाचढ़ाकर
श्रीकृष्ण आगे कहते हैं कि ‘‘जिस प्रकार वायुरहित स्थान में स्थित दीपक चलायमान नहीं होता, वैसी ही उपमा परमात्मा के ध्यान में लगे हुए योगी के जीते हुए चित्त की दी गई है’’ (6.19)। श्रीकृष्ण ने पहले एक कछुआ (2.58) और नदियों और समुद्र (2.70) का उदाहरण दिया था, जहां नदियाँ एक बार समुद्र में प्रवेश करने के बाद अपना अस्तित्व खो देती हैं और तमाम नदियों के प्रवेश करने के बावजूद समुद्र शांत रहता है। इसी तरह, इच्छाएं अपना अस्तित्व खो देती हैं जब वे योगी के समुद्र की तरह स्थिर मन में प्रवेश करती हैं।
By Siva Prasadआध्यात्मिक पथ के बारे में आम धारणा यह है कि इसका अनुसरण
एक बच्चे को एक बूढ़े व्यक्ति की तुलना में अधिक नींद की जरूरत होती है। भोजन के संबंध में हमारी आवश्यकताएं दिन की शारीरिक गतिविधियों के आधार पर भिन्न हो सकती हैं, यह दर्शाता है कि ‘यथायोग्य’ का अर्थ वर्तमान क्षण में जागरूक होना है। इसे पहले करने योग्य कर्म (6.1) या नियत कर्म (3.8) के रूप में संदर्भित किया गया था।
हमारा दिमाग अपनी कल्पना से साधारण तथ्यों को बढ़ाचढ़ाकर
श्रीकृष्ण आगे कहते हैं कि ‘‘जिस प्रकार वायुरहित स्थान में स्थित दीपक चलायमान नहीं होता, वैसी ही उपमा परमात्मा के ध्यान में लगे हुए योगी के जीते हुए चित्त की दी गई है’’ (6.19)। श्रीकृष्ण ने पहले एक कछुआ (2.58) और नदियों और समुद्र (2.70) का उदाहरण दिया था, जहां नदियाँ एक बार समुद्र में प्रवेश करने के बाद अपना अस्तित्व खो देती हैं और तमाम नदियों के प्रवेश करने के बावजूद समुद्र शांत रहता है। इसी तरह, इच्छाएं अपना अस्तित्व खो देती हैं जब वे योगी के समुद्र की तरह स्थिर मन में प्रवेश करती हैं।

925 Listeners