Ninth Habit :- ( जब भी हम किसी से बात करे तो हमारा पूरा फोकस उसकी बात को सुनने मे होना चाहिए और सामने वाले कि बातों से कुछ नया सीखने पर भी फोकस होना चाहिए )
लेखक कहते है यह आदत हर इंसान मे होनी चाहिए चाहे वह सफल हो या असफल , इस आदत के अनुसार आप हमेशा कम बोलों और ज्यादा सूने ताकि जब आप किसी को सूने तो सामने वाले को लगे की आप उसमें पूरा इंटरेस्ट ले रहे और इससे वह आप को प्रसंद करना शुरू करेगा ।
वैसे भी आप सब जानते हैं कि बड़बडीया लोगों को लोगों द्वारा कम ही प्रसंद किया जाता है और उनकी बातों को कोई तवज्जो भी नहीं देता है
अक्सर कम बोलने वाले लोगों को बहुत घ्यान से सुना जाता है और हमेशा हमारा फोकस सामने वाले कि बातो से कुछ नया सीखने पर भी होना चाहिए ।
Tenth Habit :- ( आप को हमेशा अपनी बातों को लेकर बिल्कुल साफ होना चाहिए )
लेखक कहते है हमें हमेशा अपनी बातो को बिल्कुल साफ तौर रखनी चाहिए ना कि घुमा फिराकर यानी कि हमे पेट मे दर्द होता है और जब हम डॉक्टर के पास जाते है तो हम उसे ठीक तरह से नही बता पाते और आघी अघूरी जानकारी ही दे पाते है जबकि हमे साफ - साफ जानकारी डॉक्टर को देनी चाहिए ताकि वह सही से सही समस्या का पता लगा सके ।
Elevth Habit :- ( जिंदगी आसान नही है इसलिये जिंदगी कि छोटी - छोटी खुशियों को भी दिल खोल कर जीये )
लेखक कहते है जिंदगी कभी भी आसान नही होगी इसलिये हमें अपनी हर छोटी बडी खुशी को दिल खोल कर जीना चाहिए ताकि हम इस खुबसूरत जीवन का आनंद ले सके पर इसका मतलब यह नही कि आप अपने लक्ष्य और लिये गये फैसलों को ही भुल जाये बस हमें यह सब याद रखते हुए एक आनंद से भरा जीवन जीना चाहिए ।
Twelfth Habit :- ( प्रशंसा जब भी करो सब के बीच में करो / आलोचना अकेले में करो )
लेखक कहते है प्रशंसा जब भी करो सब के बीच में करो / आलोचना अकेले में करो यानी की जब भी आप किसी की प्रशंसा करते हैं तो सबके सामने करनी चाहिए A उस इंसान के सामाजिक
रूप में और वृद्धि हो सके तथा इससे आप की भी प्रशंसा होगी क्योंकि लोग कहेंगे , देखो ये हमेशा सब की प्रशंसा करता है और हो सके तो लोगों के पीठ पीछे उनकी प्रशंसा करो ताकि जब उनको और लोगों को ये सुनाई पड़े तो वो कहे की ये तो पीठ के पीछे भी देखो लोगों की प्रशंसा करता है और आलोचना जब भी करें तो आप अकेले में करें ताकि उस उस इंसान के सामाजिक तथा व्यक्तिगत रूप से कोई ठेस ना पहुंचे ।