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मृत्यु के समय उन्हें जानने के सन्दर्भ में, श्रीकृष्ण कहते हैं, ‘‘इसलिए हे अर्जुन, तू सब समय में निरन्तर मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। इस प्रकार अर्पण किये हुए मन-बुद्धि से युक्त होकर तू नि:सन्देह मुझको ही प्राप्त होगा’’ (8.7)।
हम दिन में कुछ देर ईश्वर की पूजा करते हैं या कभी-कभी
इस पहेली का हल भक्ति योग की नींव से मिलता है, जो कहता है ‘सभी
एक बार जब यह समझ विकसित हो जाती है, तो अर्जुन को युद्ध में जाने की कृष्ण की सलाह को आसानी से समझा जा सकता है। श्रीकृष्ण ‘हाथ में जो काम है उसे करने के’ पक्ष में हैं जो कुरुक्षेत्र के युद्ध के सन्दर्भ में लड़ाई लडऩा है। निश्चित रूप से, युद्ध में परमात्मा को देखना अर्जुन के लिए भी एक कठिन परीक्षा है और हम अलग नहीं हैं।
इस अवस्था तक पहुंचने का एक व्यावहारिक तरीका यह है कि हम
By Siva Prasadमृत्यु के समय उन्हें जानने के सन्दर्भ में, श्रीकृष्ण कहते हैं, ‘‘इसलिए हे अर्जुन, तू सब समय में निरन्तर मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। इस प्रकार अर्पण किये हुए मन-बुद्धि से युक्त होकर तू नि:सन्देह मुझको ही प्राप्त होगा’’ (8.7)।
हम दिन में कुछ देर ईश्वर की पूजा करते हैं या कभी-कभी
इस पहेली का हल भक्ति योग की नींव से मिलता है, जो कहता है ‘सभी
एक बार जब यह समझ विकसित हो जाती है, तो अर्जुन को युद्ध में जाने की कृष्ण की सलाह को आसानी से समझा जा सकता है। श्रीकृष्ण ‘हाथ में जो काम है उसे करने के’ पक्ष में हैं जो कुरुक्षेत्र के युद्ध के सन्दर्भ में लड़ाई लडऩा है। निश्चित रूप से, युद्ध में परमात्मा को देखना अर्जुन के लिए भी एक कठिन परीक्षा है और हम अलग नहीं हैं।
इस अवस्था तक पहुंचने का एक व्यावहारिक तरीका यह है कि हम

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