आध्यात्मिकता का अर्थ वैराग्य जीवन जीना नहीं होता हैं बल्कि जहां भी रहो खुश रहो। कोई फर्क नहीं क्या हैं कितना है कैसा है।सात्विक भोजन व ईश्वर का नाम एवं कर्म। सर्व प्रथम स्वयं को तेजस्वी रखकर फिर अपने विचारों से किसी ओर को प्रभावित किया जा सकता हैं किसी के जीवन में प्रेरणा बन सकते हो। कर्म करना और मन पर विजय पाना। आइए जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा।