Manoj Bharti

आज तुम कुछ अलग सी थी… ❤️


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आज तुम कुछ अलग सी थी…

उन्हीं पुराने कपड़ों में मिली थी मुझे तुम,पर आज तुम कुछ अलग सी थी।

हँसी वही थी तुम्हारी प्यारी सी,पर आज तुम कुछ अलग सी थी।

आँखों में वही शरारत थी,पर आज तुम कुछ अलग सी थी।

धड़कन उतनी ही तेज़ थी जो रोज़ होती है,पर आज तुम कुछ अलग सी थी।

बातों में वही हैरानी थी,पर आज तुम कुछ अलग सी थी।

वही था तुम्हारा कस के गले लगाना,पर आज तुम कुछ अलग सी थी।

देख रही थी उसी कशिश से मेरी आँखों में,पर आज तुम कुछ अलग सी थी।

आज तुम कुछ अलग सी थी…

- मनोज भारती ♥️

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