खुशी पाने का पहला कदम है- सोखना। हमें सीखना होगा कि नकारात्मक भाव और व्यवहार तरह हमें नुकसान पहुंचाते हैं और सकारात्मक भाव से हमें किस तरह लाभ होता है।
दलाई लामा
सच्ची खुशी पाने के लिए अपने दृष्टिकोण और सोच में बदलाव लाने की जरूरत पड़ती है। उदाहरण के लिए, आपके मन में यह धारणा नहीं होनी चाहिए कि सिर्फ एक ही तरीका, एक ही रहस्य है और अगर वह आप ठीक से कर लें तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। यह अच्छे ढंग से शरीर की देखभाल करने जैसा है उसके लिए आपको एकाध नहीं, बल्कि कई प्रकार के विटामिन एवं पोषक तत्त्वों की जरूरत होती है।
इसी तरह, खुशी पाने के लिए अनेक तरीकों की आवश्यकता होती है। बदलाव में समय लगता है। यहां तक कि शारीरिक बदलाव में भी वक्त लगता है। यह सीखने की प्रक्रिया है। प्रतिदिन जब आप सुबह उठते हैं, तो आप यह सोचें- मैं इस दिन को अधिक सकारात्मक तरीके से बिताऊंगा। मुझे यह दिन बर्बाद नहीं करना है। उसके बाद रात को सोने से पहले, देखिए कि आपने दिनभर क्या किया और खुद से पूछिए, 'क्या मैंने आज का दिन उसी तरह बिताया, जैसे मैंने सोचा था?" अगर सब कुछ उसी तरह हुआ तो आपके लिए यह खुशी की बात होगी। यदि उस तरह नहीं हुआ तो आपको दुख होगा और आप इसकी समीक्षा करेंगे। इस तरह के तरीकों की मदद से आप धीरे-धीरे अपने दिमाग के सकारात्मक पहलुओं को मजबूत कर सकते हैं। - आनंद का सरल मार्ग किताब से साभार