यह पॉडकास्ट आपको स्वयं के सुधार के द्वारा बुराइयों को जीतकर अच्छाई की तरफ बढ़ते हुए स्वयं का विकास के साथ-साथ सर्वजन हिताय की बात पर जोर देता है। अंदर की बुराइयां के समाप्त होने पर ही सही रूप में दशहरा का उद्देश्य सिद्ध होगा। अतः यह कविता अपने शीर्षक को सार्थक करती है। अंदर का दशहरा मनाएं।