Ruhaani Poems

आपकी मुस्कान ढूँढ लाएं


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आज लगता है वो फिर अपनी 
मुस्कान घर लाना भूल गए
बच्चों से कहा, देखो!!
कहीं कार में न भूले हो
जा के देख आओ
ऑफिस में भूले होंगे तो मिल भी जायेगी
मगर , कहीं रास्ते में न गिर पड़ी हो
आज लगता है वो फिर अपनी 
मुस्कान घर लाना भूल गए
हंसी के बिना आपका
उदास चेहरा अच्छा नहीं लगता
बच्चों पे किया गुस्सा
मम्मी पापा को भी नाराज़ कर जाता है
हम सब को आपसे प्यार है इसलिए
चलो न! ढूंढ लाते है आपकी मुस्कान
शायद कहीं आइसक्रीम में छुपी होगी
या पुराने दोस्तों के पास रखी हो
चलो आज कहीं घूम आएं
आपकी मुस्कान ढूंढ लाते है...सुमन
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Ruhaani PoemsBy Suman Rakesh Shah