पन्ना जिले की पहचान भले ही हीरे से होती हो, लेकिन जिले का अपना समृद्धशाली इतिहास है..धर्म से जुड़ाव को इसी से समझा जा सकता है कि पन्ना का उल्लेख प्राचीन ग्रंथ रामायण, रामचरित्रमानस और विष्णु पुराण में भी है, भगवान राम वनवास के दौरान यहां रुके थे। यहां एक नहीं कई प्राचीन मंदिर हैं, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
श्री प्राणनाथ मंदिर
यह प्रणामी सम्प्रदाय का प्रमुख मंदिर है जो प्रणामी सम्प्रदाय में 'गुम्मट जी’ के नाम से विख्यात है। मंदिर के सामने दूसरा मंदिर है जिसे ‘श्री बंगला जी’ कहते हैं। मंदिर के गर्भगृह में महामति श्री प्राणनाथ जी के दर्शन परब्रह्म श्री कृष्ण के मुरली मुकुटधारी नित्य किशोर स्वरूप में होते हैं। मंदिर के आंतरिक सज्जा बुंदेली परम्परा के अनुसार है। दीवालों और ढलवों छत पर श्री कृष्ण की अखंड रासलीला के चित्र उत्कीर्ण हैं। शरदपूर्णिमा के अवसर पर यहाँ एक सप्ताह तक अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव का आयोजन किया जाता है जिसमें प्रणामी समाज के साथ-साथ देश-विदेश से अन्य सभी धर्मों के लोग भी आकर बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।
जुगल किशोरजी मंदिर
जुगल किशोरजी मंदिर का निर्माण पन्ना के चौथे बुंदेला राजा राजा हिंदूपत सिंह ने अपने शासनकाल के दौरान 1758 से 1778 तक किया था। मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति के माथे में हीरा लगा हुआ है और राधा जी की मूर्ति चंदन की लकड़ी की बनी हुई है। किंवदंतियों के अनुसार, इस मंदिर के गर्भगृह में रखी गई मूर्ति को ओरछा के रास्ते वृंदावन से लाया गया है। मंदिर में बुंदेला मंदिरों की सभी स्थापत्य विशेषताएं हैं, जिसमें एक नट मंडप, भोग मंडप और प्रदक्षणा मार्ग शामिल हैं।
बलदेव मंदिर
बलदेवजी मंदिर एक रोमन वास्तुकला से प्रेरित है। मंदिर का निर्माण महाराज रुद्रप्रताप सिंह जूदेव ने 1933 में बनाया था। मंदिर का गुम्मद कलकता स्थित विक्टोरिया पैलेस से मिलता है और मंदिर का स्वरूप लंदन स्थित सेंटपाल चर्च से मिलता है। श्री बलदेवजी की आकर्षक प्रतिमा का निर्माण काले शालिग्राम पत्थर में किया गया है। इसमें भगवान बलदाऊ के माथे में हीरा लगा हुआ है, जो दूर से ही सुंदर प्रतीत होता है।