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हर इंसान के जीवन में उतार-चढ़ाव का दौर आता है। ज़्यादातर लोग मुश्किल वक़्त में हार मानकर घुटने टेक देते हैं। या तो अपना काम करना छोड़ देते हैं या काम बदल लेते हैं। वक़्त हमेशा एक सा नहीं रहता, जब स्थितियाँ बदलती हैं तब ऐसे लोग ज़्यादा बुरी स्थिति में आ जाते हैं। क्योंकि या तो आलस्य उनके जीवन का हिस्सा बन बन चुका होता है या समय गुज़र जाने के कारण उन्हें रास्ता ही नहीं सूझता कि अब किधर जाएं? कर्मठ और परिश्रमी हर स्थिति-परिस्थिति में अपना काम करना नहीं छोड़ते, प्रतिकूल परिस्थितियों में भी वे निरंतर अभ्यास करते रहते हैं। उनकी लगन और जीवटता के चलते सारा ब्रह्माण्ड उनका साथ देता है, और जब स्थितियाँ अनुकूल हो जाती हैं तब वे कई गुना ज़्यादा गति से सफलता की राह में आगे बढ़ जाते हैं और बाक़ी लोग सोचते ही रह जाते हैं।
By Manoj Shrivastavaहर इंसान के जीवन में उतार-चढ़ाव का दौर आता है। ज़्यादातर लोग मुश्किल वक़्त में हार मानकर घुटने टेक देते हैं। या तो अपना काम करना छोड़ देते हैं या काम बदल लेते हैं। वक़्त हमेशा एक सा नहीं रहता, जब स्थितियाँ बदलती हैं तब ऐसे लोग ज़्यादा बुरी स्थिति में आ जाते हैं। क्योंकि या तो आलस्य उनके जीवन का हिस्सा बन बन चुका होता है या समय गुज़र जाने के कारण उन्हें रास्ता ही नहीं सूझता कि अब किधर जाएं? कर्मठ और परिश्रमी हर स्थिति-परिस्थिति में अपना काम करना नहीं छोड़ते, प्रतिकूल परिस्थितियों में भी वे निरंतर अभ्यास करते रहते हैं। उनकी लगन और जीवटता के चलते सारा ब्रह्माण्ड उनका साथ देता है, और जब स्थितियाँ अनुकूल हो जाती हैं तब वे कई गुना ज़्यादा गति से सफलता की राह में आगे बढ़ जाते हैं और बाक़ी लोग सोचते ही रह जाते हैं।