Zubaan-E-Madhav

ACHA CHALO JAANE DO


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वो रात बतियाती ,दिन सुलाते , उस कोने वाले पलंग पर ,
जहा पर एक ख्वाबी तुम अक़्सर साथ लेटी रहती। और कुछ ख़्याल है जो आज छन कर आये है।
कुछ मलाल है, जो कही टहलके दूर जाता ही नहीं।
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Zubaan-E-MadhavBy madhav sharma