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जब शरीर पर कोई गहरा ज़ख़्म लगता है तो बार- बार ध्यान वहीं जाता है, एक टीस जो लगातार साथ बनी रहती है।
यही मन के साथ भी है जब मन आहत होता है तो शरीर को भी तोड़ देता है। इसमें अपने गुस्से, दर्द को supress नहीं करना चाहिए बल्कि उसको channalise करने की कोशिश करनी चाहिये।
ख़ुद को ज़्यादा प्यार और देखभाल दें, बीमार मन, बीमार शरीर से भी ज़्यादा नाज़ुक हो जाता है। Supress करने से नये रोग पैदा होंगे। याद रखिये निशान भले ही छूट जाए पर धीरे-धीरे हर घाव भर ही जाता है।
-ET
#Healing #SelfCare #DontLookForValidation #LifeLessons
By Era Takजब शरीर पर कोई गहरा ज़ख़्म लगता है तो बार- बार ध्यान वहीं जाता है, एक टीस जो लगातार साथ बनी रहती है।
यही मन के साथ भी है जब मन आहत होता है तो शरीर को भी तोड़ देता है। इसमें अपने गुस्से, दर्द को supress नहीं करना चाहिए बल्कि उसको channalise करने की कोशिश करनी चाहिये।
ख़ुद को ज़्यादा प्यार और देखभाल दें, बीमार मन, बीमार शरीर से भी ज़्यादा नाज़ुक हो जाता है। Supress करने से नये रोग पैदा होंगे। याद रखिये निशान भले ही छूट जाए पर धीरे-धीरे हर घाव भर ही जाता है।
-ET
#Healing #SelfCare #DontLookForValidation #LifeLessons