गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - ज्ञानी पुरुष दिव्य ज्ञान की अग्नि से शुद्ध होकर बाहर सारे कर्म करता है किंतु अंतर में उन कर्मों के फल का परित्याग करता हुआ शांति, विरक्ति, आध्यात्मिक दृष्टि तथा आनंद की प्राप्ति करता है