गीतोपनिषद : श्रीमद्भगवद्गीता गीता यथारूप : कृष्णकृपामूर्ति हिंदी श्री श्रीमद् ए.सी.भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद संस्थापकचार्य : अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ - अष्टांग योग मन तथा इंद्रियों को नियंत्रित करता है और ध्यान को परमात्मा पर केंद्रित करता है। इस विधि की परिणिति समाधि में होती है।