Akhiri Khat

Ahl-e-safar (अह्ल-ऐ -सफ़र)


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हर दौर में रहते हैं,

नए दौर की तलाश में
सफ़र को दस्तूर बना रखा है
अपने ही ख़्वाबों को
अधर में , भंवर में ,
डूबने को छोड़
निकल पड़ते हैं, रोज,
नये सौर की तलाश में
यूँ ही गुरूर था हमें ,
अह्ल-ऐ -सफ़र पर “सुख़नवर”,
वो साथ तो चलते गए,
पर किसी और की तलाश में ।

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Akhiri KhatBy Pratyush Srivastava (सुख़नवर)