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एक ऐसी कहानी जो हमें दिखाती है कि दर्द, संघर्ष और अन्याय से जूझती एक साधारण-सी लड़की सारा के भीतर कितनी गहरी ताक़त छुपी है। पहली मोहब्बत खोकर, बेटी से बिछड़कर, दूसरी शादी में मारपीट और बेबसी सहकर भी वह हार नहीं मानती। अब पति की बीमारी और ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबकर भी उसके होंठों पर सिर्फ़ एक सवाल है — ‘क्यों हमेशा मेरे साथ ही?’ यह कहानी सिर्फ़ सुनाई नहीं जाती, महसूस कराई जाती है, ताकि हम सब उसकी दुआओं में शामिल हो सकें।
By Diksha Goyalएक ऐसी कहानी जो हमें दिखाती है कि दर्द, संघर्ष और अन्याय से जूझती एक साधारण-सी लड़की सारा के भीतर कितनी गहरी ताक़त छुपी है। पहली मोहब्बत खोकर, बेटी से बिछड़कर, दूसरी शादी में मारपीट और बेबसी सहकर भी वह हार नहीं मानती। अब पति की बीमारी और ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबकर भी उसके होंठों पर सिर्फ़ एक सवाल है — ‘क्यों हमेशा मेरे साथ ही?’ यह कहानी सिर्फ़ सुनाई नहीं जाती, महसूस कराई जाती है, ताकि हम सब उसकी दुआओं में शामिल हो सकें।