मुमुक्षु

अष्टावक्र गीता अध्याय 5


Listen Later

इस अध्याय में श्री अष्टावक्र जी राजा जनक को इस दृश्यमान जगत की असत्यता के बारे में बताते हुए कहते है कि तुम इसको जान कर मुक्त हो जाओ । वो कहते हैं कि शुद्ध स्वरूप में इस जगत का कोई अस्तित्व नहीं है। यह सब भ्रम है जो यह सत्य दिखाई पड़ रहा है।
...more
View all episodesView all episodes
Download on the App Store

मुमुक्षुBy Shrikant Mathur