खिस्सा-ए-जिंदगी

औरत तो पराई होवे ...


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शायद मैं अभी पराई हूं, और कितने साल पराई रहूंगी। कोई बता सकता है? वह भी तब जब मैंने अपना तन-मन धन सब अर्पण कर रखा है।

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खिस्सा-ए-जिंदगीBy Avinash K Shahi