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इलाज से ज़्यादा दर्द सहना मंज़ूर था… लेकिन बेटी से ऐसा काम करवाना पाप!”
मेरी ओपीडी में बाबाजी की ये सोच मुझे चौंका गई।
आज जब औरतें रोज़ अपमान और हिंसा झेल रही हैं, क्या हमें इस ‘संस्कार’ से कुछ सीखना चाहिए?
By Diksha Goyalइलाज से ज़्यादा दर्द सहना मंज़ूर था… लेकिन बेटी से ऐसा काम करवाना पाप!”
मेरी ओपीडी में बाबाजी की ये सोच मुझे चौंका गई।
आज जब औरतें रोज़ अपमान और हिंसा झेल रही हैं, क्या हमें इस ‘संस्कार’ से कुछ सीखना चाहिए?