आज कुछ बच्चो के लिये लेकर आई हूँ और बच्चे ही क्यूँ हम बड़ों को भी बादलों की दुनिया हमेशा लुभाती है ना…तो …आज चलो मेरे साथ बादलों की दुनिया की सैर कर आते
मै पहुँची आज बादलों की अज़ब दुनिया में
बादलों की सड़कें थी, बादलों के ही थे पहाड़
रुई सी नरम थी वो बादलों की सफ़ेद दुनिया
गम ए ज़िन्दगी कितने छोटे हो गए वहां
परियों की छोटी सी दुनिया थी
जो सपनों की दुनिया दिखा कर मुझे
बचपन की कहानियां याद दिला गयी
मै खेलती, उड़ती.... दौड़ रही थी
एक खरगोश, एक हिरन के संग
एक बादल से ..दूसरे बादल को फांद रही थी
इस सफ़ेद, नीली सी दुनिया के
ख्यालों में डूबती - उतरती सी घूम रही थी
तभी एक काले बादल ने.. रास्ता मेरा रोक दिया
नन्हा सा ये दिल मेरा ...मानो धड़कना ही भूल गया
मै घबरायी, पैर फिसल गया और मैं गिर पड़ी नीचे
गिरते गिरते पहुँच गयी फिर अपनी दुनिया में
अपनों के बीच,... खुद पे ही हंस पडी
मेरी अपनी दुनिया भी कुछ... बुरी तो नहीं .... सुमन