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प्राचीन ग्रंथ अक्सर मानवता और दिव्यता की एक दृष्टि को दर्शाते हैं। वे अक्सर यह बताते हैं कि "क्या है", न कि यह कि "क्या होना चाहिए"। बाइबल न केवल मानवता का र्णन करती है जैसी वह है, बल्कि यह भी बताती है कि मानवता को कैसी होनी चाहिए — और इसके साथ-साथ न केवल एक लक्ष्य देती है, बल्कि उस लक्ष्य तक पहुँचने का मार्ग भी बताती है। यह लक्ष्य इतना महान है और उपाय इतने असामान्य हैं कि यदि आप संदेहपूर्ण दृष्टिकोण से देखें, तो पूरा विचार असंभव और अव्यावहारिक लगता है। फिर भी, नीचे कुछ उदाहरणात्मक वचन दिए गए हैं जो दर्शाते हैं कि बाइबल मानवता से क्या चाहती है: 1 पतरस 1:15-16 "पर जैसा वह जिसने तुम्हें बुलाया है पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सब आचरण में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है: 'पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ।'" टिप्पणी: बाइबल का लक्ष्य है कि सभी मनुष्य आत्मिक और नैतिक रूप से परमेश्वर के समान बनें।
By Bible Bardप्राचीन ग्रंथ अक्सर मानवता और दिव्यता की एक दृष्टि को दर्शाते हैं। वे अक्सर यह बताते हैं कि "क्या है", न कि यह कि "क्या होना चाहिए"। बाइबल न केवल मानवता का र्णन करती है जैसी वह है, बल्कि यह भी बताती है कि मानवता को कैसी होनी चाहिए — और इसके साथ-साथ न केवल एक लक्ष्य देती है, बल्कि उस लक्ष्य तक पहुँचने का मार्ग भी बताती है। यह लक्ष्य इतना महान है और उपाय इतने असामान्य हैं कि यदि आप संदेहपूर्ण दृष्टिकोण से देखें, तो पूरा विचार असंभव और अव्यावहारिक लगता है। फिर भी, नीचे कुछ उदाहरणात्मक वचन दिए गए हैं जो दर्शाते हैं कि बाइबल मानवता से क्या चाहती है: 1 पतरस 1:15-16 "पर जैसा वह जिसने तुम्हें बुलाया है पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सब आचरण में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है: 'पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ।'" टिप्पणी: बाइबल का लक्ष्य है कि सभी मनुष्य आत्मिक और नैतिक रूप से परमेश्वर के समान बनें।