Kumar.Samvad

बैल by कुमार संवाद feat. अतुल सुभाष


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ये कविता पुरुषों के जीवन में घर रहे एक व्यवस्थित धीमे नरसंहार को दिखाती है जिसमें न्यायपालिका एक बड़ा रोल अदा करती है और फेमिनिज्म उसका माध्यम है
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Kumar.SamvadBy Kumar