Written and voice by Deepak mahapatre.
बे-ज़ुबान
जो कभी किस्से थे आज वो कहानियां बन गए,
जो कभी दिल-ए-अल्फ़ाज कहते थे वो बेज़ुबान बन गए,
जिनका कभी राज होता था इन आसमानो में
वो चन्द दानो के मेहरबान हो गए, वो बेज़ुबान बन गए,
दादी सुनाती थी राजा रानी परिंदों की कहानियां
कहानियों में अब इंसान हैवान बन गए,वो बे-ज़ुबान बन गए,
चहकते लाली सुन रह गए, निल गगन अब धुंध रह गए
ना करो पूजा ,ना करो फ़रियाद तुम ही सैतान हैवान बन गए, वो बेज़ुबान बन गए,
तड़प उठी रूह, नन्ही जान तड़प देखा, बे-जान पंखों को मैने फेंकते देखा
डर,दर्द हैवानियत से कांप उठी थी वो, ये इंसान तूम भी कैसे बे जान बन गए,
चहकते नन्ही जान बे-ज़ुबान बन गए,
जिनका कभी ये आसमाँ था, रौंद आंखें ये सियाह हो गए
जल गई पंखें ये मुर्शित टूट ग़ुरबत बे जान बन गए, वो बे-ज़ुबान बन गए,
चुभते दानों को डाल लेते हो बड़े तस्वीरें
जो कभी तुम्हारा था नही वो दे तुम कर्ज़दान बन गए, वो बे-ज़ुबान बन गए
इस चमकते महफ़िल का ए दीपक मैं भी तो एक गुलदान हूँ
इन महफिलों का परोंदें-ए-दर देख रोशनदान बन गए, वो बे-ज़ुबान बन गए।