Ruhaani Poems

बेरहम वक़्त ही है मरहम


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वक़्त सबसे बड़ा मरहम है,
बचपन से सुनती आई हूँ पर 
ये वक़्त दर्द में इतना रुका सा क्यूँ 
प्रतीत होता है 
तेरे संग बीते वो प्यारे पल
कितनी जल्दी यादों में
तब्दील हो गए
तब पकड़ने की कोशिश भी तो नही करती थी 
हर अगले पल का बेसब्री से इन्तज़ार करती थी और बस यूँ ही सारे पल मुट्ठी से फिसल गए और अब तेरे चले जाने का ये दर्द ….
जानती हूँ निकल ही जायेगा ये वक़्त भी ….कुछ भी तो कायम नही रहता यहाँ पे 
मगर ये वक़्त दर्द में इतना रुका सा क्यूँ लगता हैं 
... सुमन
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Ruhaani PoemsBy Suman Rakesh Shah