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भगवान परशुराम के शिष्य – कर्ण
कर्ण का पालन पोषण महाराज धृतराष्ट्र के सारथी ने किया और वो भी युद्धकला की शिक्षा के लिए गुरु द्रोण के गुरुकुल गए। वहाँ अर्जुन से ईर्ष्यावश उन्होंने द्रोणाचार्य से ब्रह्मास्त्र की शिक्षा देने के लिए कहा।
जब गुरु द्रोण ने इसका कारण पूछा तो कर्ण ने अर्जुन को हराकर खुद को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनने की इच्छा के बारे में बता दिया। गुरु को ईर्ष्या से ग्रसित यह कारण सही नहीं लगा और उन्होंने कर्ण को ब्रह्मास्त्र का ज्ञान देने से मना कर दिया।
इस प्रकार गुरु द्रोण से निराश होकर कर्ण भगवान परशुराम की शरण में गए और उनसे कहा कि वो एक भार्गव ब्राह्मण हैं और उनसे ब्रह्मास्त्र की शिक्षा लेना चाहते हैं।
भगवान परशुराम ने कर्ण को ब्रह्मास्त्र की शिक्षा दी परंतु जब उन्हें पता चला कि कर्ण एक क्षत्रिय और उन्होंने झूठ बोलकर शिक्षा प्राप्त की है तो उन्होंने कर्ण को श्राप दे दिया कि जब कर्ण को अपने इस ज्ञान की सबसे ज्यादा आवश्यकता होगी तब वो अपना ज्ञान भूल जायेंगे।
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By Sutradharभगवान परशुराम के शिष्य – कर्ण
कर्ण का पालन पोषण महाराज धृतराष्ट्र के सारथी ने किया और वो भी युद्धकला की शिक्षा के लिए गुरु द्रोण के गुरुकुल गए। वहाँ अर्जुन से ईर्ष्यावश उन्होंने द्रोणाचार्य से ब्रह्मास्त्र की शिक्षा देने के लिए कहा।
जब गुरु द्रोण ने इसका कारण पूछा तो कर्ण ने अर्जुन को हराकर खुद को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनने की इच्छा के बारे में बता दिया। गुरु को ईर्ष्या से ग्रसित यह कारण सही नहीं लगा और उन्होंने कर्ण को ब्रह्मास्त्र का ज्ञान देने से मना कर दिया।
इस प्रकार गुरु द्रोण से निराश होकर कर्ण भगवान परशुराम की शरण में गए और उनसे कहा कि वो एक भार्गव ब्राह्मण हैं और उनसे ब्रह्मास्त्र की शिक्षा लेना चाहते हैं।
भगवान परशुराम ने कर्ण को ब्रह्मास्त्र की शिक्षा दी परंतु जब उन्हें पता चला कि कर्ण एक क्षत्रिय और उन्होंने झूठ बोलकर शिक्षा प्राप्त की है तो उन्होंने कर्ण को श्राप दे दिया कि जब कर्ण को अपने इस ज्ञान की सबसे ज्यादा आवश्यकता होगी तब वो अपना ज्ञान भूल जायेंगे।
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