Sign up to save your podcastsEmail addressPasswordRegisterOrContinue with GoogleAlready have an account? Log in here.
July 12, 2020Bulandi1 minutePlayदूर तक फैला समंदर...कूद पड़ मजदार मे...हिमाते मर्दा ए बन्दे...रह खुद बन जाएगी...औकात तो मन का वहम है...आज भुज फैला के देखा...जो वर्ज हो प्रहार तो...चट्टान क्या टिक पायेगी...moreShareView all episodesBy AlfaazJuly 12, 2020Bulandi1 minutePlayदूर तक फैला समंदर...कूद पड़ मजदार मे...हिमाते मर्दा ए बन्दे...रह खुद बन जाएगी...औकात तो मन का वहम है...आज भुज फैला के देखा...जो वर्ज हो प्रहार तो...चट्टान क्या टिक पायेगी...more
दूर तक फैला समंदर...कूद पड़ मजदार मे...हिमाते मर्दा ए बन्दे...रह खुद बन जाएगी...औकात तो मन का वहम है...आज भुज फैला के देखा...जो वर्ज हो प्रहार तो...चट्टान क्या टिक पायेगी
July 12, 2020Bulandi1 minutePlayदूर तक फैला समंदर...कूद पड़ मजदार मे...हिमाते मर्दा ए बन्दे...रह खुद बन जाएगी...औकात तो मन का वहम है...आज भुज फैला के देखा...जो वर्ज हो प्रहार तो...चट्टान क्या टिक पायेगी...more
दूर तक फैला समंदर...कूद पड़ मजदार मे...हिमाते मर्दा ए बन्दे...रह खुद बन जाएगी...औकात तो मन का वहम है...आज भुज फैला के देखा...जो वर्ज हो प्रहार तो...चट्टान क्या टिक पायेगी