MSUVACH

बूढ़े बाज़ की सलाह


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जीवन का दूसरा नाम ही संघर्ष है। लेकिन अक़्सर हम छोटी‌-मोटी उपलब्धियाँ हासिल करने के बाद ख़ुद को आरामपरस्त बना लेते हैं। अक़्सर हम भूल जाते हैं कि आरामपरस्ती एक लाइलाज़ बीमारी है। एक बार यह बीमारी लग जाय तो इससे बाहर निकलना आसान नहीं होता। आरामपरस्त व्यक्ति जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना नहीं कर पाते और अक़्सर टूट जाते हैं। इसलिए हमेशा कुछ न कुछ नया करते रहें, अपने-आप को हमेशा सक्रिय रखें और जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना हँसते हुए और मज़े के साथ करें। ज़िंद्गी मज़ेदार हो जायेगी।

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MSUVACHBy Manoj Shrivastava