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जीवन में जब भी लगे कि चारों तरफ अंधकार ही अंधकार है, मन अशांत होने लगे, विश्वास डगमगाने लगे, लगे की हर तरफ नफ़रत ही नफ़रत है, जीवन में प्रेम बचा ही नहीं। तब भी हमें आशा का दामन थामे रखना चाहिए। उम्मीद की एक किरण ही काफ़ी है सारी दुनिया से अंधकार मिटाने के लिए। वक़्त कभी एक सा नहीं रहता।
By Manoj Shrivastavaजीवन में जब भी लगे कि चारों तरफ अंधकार ही अंधकार है, मन अशांत होने लगे, विश्वास डगमगाने लगे, लगे की हर तरफ नफ़रत ही नफ़रत है, जीवन में प्रेम बचा ही नहीं। तब भी हमें आशा का दामन थामे रखना चाहिए। उम्मीद की एक किरण ही काफ़ी है सारी दुनिया से अंधकार मिटाने के लिए। वक़्त कभी एक सा नहीं रहता।