प्रत्यक्ष जगत को एकमात्र सत्य मानने के फलस्वरूप चार्वाक का उद्देश्य जीवन के सुखों को अंगीकार करना हो जाता है । अतएव चार्वाक का जड़वादी दर्शन स्वतः सुखवादी हो जाता है । अब चार्वाक को सुखवाद की व्याख्या उसके नीति विज्ञान के साथ करते हैं ।
प्रत्यक्ष जगत को एकमात्र सत्य मानने के फलस्वरूप चार्वाक का उद्देश्य जीवन के सुखों को अंगीकार करना हो जाता है । अतएव चार्वाक का जड़वादी दर्शन स्वतः सुखवादी हो जाता है । अब चार्वाक को सुखवाद की व्याख्या उसके नीति विज्ञान के साथ करते हैं ।