Kaviraj

चावल का दाना


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भूख के मायने व्यक्ति, स्थान और समय के अनुरूप बदलते हैं। कुछ लोग दिन भर चरने के बाद भी भूखे महसूस करते हैं। कुछ खाने के लिए जीते हैं और कुछ रिंकू की तरह होते हैं जिनकी कल्पनाओं में भूख कई दर्जे ऊपर बैठी रहती है जिसको बस आंखों से संतुष्ट किया जाता है। क्या मायने हैं अक्षय पात्र का रिंकू के लिए ये कहानी उसे बयां करती है।अस्वीकरण: कविराज चैनल में व्यक्त की गई राय वक्ताओं और प्रतिभागियों की व्यक्तिगत रायों में से एक है। जरूरी नहीं है कि वे कविराज पॉडकास्ट चैनल या एंकर की राय या विचारों को दर्शाते हों। सभी पात्रों का नाम काल्पनिक है और किसी भी प्रकार की समानता मात्र एक संयोग होगा।
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KavirajBy Harish Benjwal