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कभी-कभी घर की छोटी-छोटी बातें घर तबाह कर देती हैं, घर बसने से पहले ही उजाड़ देती हैं,सपनों के ताजमहल मिनट में ढेर कर देती हैं । मेरी बेटी का क्या कसूर था ? ये सब सोचते हुए उठते हैं और शिवानी से सामान पैक करने को कहते हैं
By Er. Nishant Saxena Aahaanकभी-कभी घर की छोटी-छोटी बातें घर तबाह कर देती हैं, घर बसने से पहले ही उजाड़ देती हैं,सपनों के ताजमहल मिनट में ढेर कर देती हैं । मेरी बेटी का क्या कसूर था ? ये सब सोचते हुए उठते हैं और शिवानी से सामान पैक करने को कहते हैं