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एक डॉक्टर की सच्ची और मार्मिक कहानी है, जो पठानकोट की सरहद पर, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्लैकआउट और डर के माहौल में भी अपनी ड्यूटी निभाती है। जब पूरा शहर खामोश था, अस्पताल की रौशनी और इंसानियत की धड़कन ज़िंदा थी। इस कहानी में एक गर्भवती महिला की आशा, एक डॉक्टर का समर्पण, और एक पिता का देशभक्ति से भरा वचन — सब कुछ एक साथ गूँजता है। यह सिर्फ युद्ध की नहीं, मानवता, विश्वास और नयी ज़िंदगी की भी कहानी है। एक ऐसी सच्ची घटना, जो दिल को छू जाती है।
By Diksha Goyalएक डॉक्टर की सच्ची और मार्मिक कहानी है, जो पठानकोट की सरहद पर, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्लैकआउट और डर के माहौल में भी अपनी ड्यूटी निभाती है। जब पूरा शहर खामोश था, अस्पताल की रौशनी और इंसानियत की धड़कन ज़िंदा थी। इस कहानी में एक गर्भवती महिला की आशा, एक डॉक्टर का समर्पण, और एक पिता का देशभक्ति से भरा वचन — सब कुछ एक साथ गूँजता है। यह सिर्फ युद्ध की नहीं, मानवता, विश्वास और नयी ज़िंदगी की भी कहानी है। एक ऐसी सच्ची घटना, जो दिल को छू जाती है।