जैसे जैसे हम बड़े होते है, हम अपना जीवन दिमाग के अंदर जीने लग जाते है। जहा होते है उसका आनंद लेने की जगह हमारे दिमाग में जो है उसमे फसे रह जाते है। बाहर निकलिए और जीवन का आनंद लीजिए।
जैसे जैसे हम बड़े होते है, हम अपना जीवन दिमाग के अंदर जीने लग जाते है। जहा होते है उसका आनंद लेने की जगह हमारे दिमाग में जो है उसमे फसे रह जाते है। बाहर निकलिए और जीवन का आनंद लीजिए।