दरिन्दे (Darinde) By Sona Uniyal हर रोज़ एक नई सुबह के साथ औरत आपने सफर के लिए कुछ करती है। पर जाने किस मोड़ पे वो दरिंदों की हवस का शिकार बन जाये किसी को नही पता। इसी पीड़ा और दर्द को बयान करती है कविता 'दरिंदे'
दरिन्दे (Darinde) By Sona Uniyal हर रोज़ एक नई सुबह के साथ औरत आपने सफर के लिए कुछ करती है। पर जाने किस मोड़ पे वो दरिंदों की हवस का शिकार बन जाये किसी को नही पता। इसी पीड़ा और दर्द को बयान करती है कविता 'दरिंदे'