सभी कार्य अर्गला स्तोत्र के पाठ मात्र से पूरी हो जाती हैं। समस्त कार्यों में विजयश्री इस पाठ मात्र को करने से प्राप्त होती है। देवी कवच के माध्यम से पहले चारों ओर सुरक्षा का घेरा बनाया जाता है और उसके बाद अर्गला स्तोत्र से देवी भगवती से विजयश्री की कामना की जाती है। अर्गला स्तोत्र अमोघ है। रूप, जय, यश देने वाला।