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उस दिन मेरी ड्यूटी क्रिटिकल केयर वार्ड में थी। यह कोरोना की दूसरी लहर थी, जो भयावह रुख लेती जा रही थी। घर छोड़े मुझे आज दस दिन हो गए थे। पत्नी भी ड्यूटी पर तैनात थी। हालांकि, हम अलग-अलग वार्ड में थे, पर दोनों ही घर नहीं जा सकते थे। घर जाना मतलब अपने ही परिवार को मुसीबत में डालना था। पत्नी के लिए नर्सिंग होस्टल में एक रूम हो गया था, जहाँ वह कुछ देर आराम कर सकती थी। लेकिन, मेरे लिए अभी मेरी कार ही मेरा घर था। वही मेरा बेड, मेरी लाइब्रेरी, मेरा वार्डरोब बनी हुई थी।
By डॉ .स्वाति तिवारीउस दिन मेरी ड्यूटी क्रिटिकल केयर वार्ड में थी। यह कोरोना की दूसरी लहर थी, जो भयावह रुख लेती जा रही थी। घर छोड़े मुझे आज दस दिन हो गए थे। पत्नी भी ड्यूटी पर तैनात थी। हालांकि, हम अलग-अलग वार्ड में थे, पर दोनों ही घर नहीं जा सकते थे। घर जाना मतलब अपने ही परिवार को मुसीबत में डालना था। पत्नी के लिए नर्सिंग होस्टल में एक रूम हो गया था, जहाँ वह कुछ देर आराम कर सकती थी। लेकिन, मेरे लिए अभी मेरी कार ही मेरा घर था। वही मेरा बेड, मेरी लाइब्रेरी, मेरा वार्डरोब बनी हुई थी।