खिस्सा-ए-जिंदगी

एक चाट वाला था।


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कहीं ऐसा न हो कि भगवान अपनी भाग्यवाली चाबी लगा रहा हो और हम अपनी परिश्रम वाली चाबी न लगा पायें और ताला खुलने से रह जाये।

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खिस्सा-ए-जिंदगीBy Avinash K Shahi