https://youtu.be/UcBhHYA_PvY यहां कही जा रही कहानी देश की आज़ादी के पचासवें बरस के दौरान की एक छोटी सी, मामूली-सी प्रेम कहानी है। हो सकता है आपको यह प्रेम कहानी तो क्या, कहानी ही न लगे और आप कहें कि यह सब क्या बकवास है?
जीवन के साथ यही तो तकलीफ़ है। जब जीवन की बात की जाये तो कहानी लगती है और जब कहानी सुनायी जाये तो लगता है, इसमें कहानी जैसा तो कुछ भी नहीं। हम यही सब कुछ तो रोज देखते-सुनते रहते हैं। फिर भी यह कहानी कहनी ही है। जीवन या कहानी जो कुछ भी है, यही है। बाकी फ़ैसला आपका। खैर।