खिस्सा-ए-जिंदगी

एक नागरिक खतरे में है तो पूरा देश खतरे में है ...


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अगली बार कोई आपको अपनी समस्या बतायेे और आप को लगे कि ये मेरी समस्या नहीं है, तो रुकिए और दुबारा सोचिये।


समाज का एक अंग, एक तबका, एक नागरिक खतरे में है तो पूरा देश खतरे में है। 

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खिस्सा-ए-जिंदगीBy Avinash K Shahi