आज केरल में जो हुआ , उसकी जितनी भर्त्सना की जाए उतनी ही कम, ऐसी घटनायें हमें सोचने और विवश करती हैं कि क्या सिर्फ गुनहगारों को उनके किये की सज़ा देना ही काफी है! यदि उन्हें सजा मिल भी जाती है तो क्या आनेवाले समय मे जानवरों पर ऐसे ज़ुल्म होना बंद हो जाएंगे? इंसानियत पर सवाल उठाने वाले इन कृत्यों पर गहन मंथन की आवश्यकता है!