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आप कब तक किसी की यादों को दिल में दबाये रख सकते हैं? कभी न कभी एक वक़्त ऐसा आएगा जब उन यादों को दिल और दिमाग से निकाल देना पड़ेगा और एक नयी शुरुआत करनी पड़ेगी, लेकिन ये नयी शुरुवात होगी कहाँ से और क्या इस नयी शुरुवात को कर पाना इतना आसान है?
By Rajat Kumarआप कब तक किसी की यादों को दिल में दबाये रख सकते हैं? कभी न कभी एक वक़्त ऐसा आएगा जब उन यादों को दिल और दिमाग से निकाल देना पड़ेगा और एक नयी शुरुआत करनी पड़ेगी, लेकिन ये नयी शुरुवात होगी कहाँ से और क्या इस नयी शुरुवात को कर पाना इतना आसान है?