
Sign up to save your podcasts
Or


नोमो यानी नो मोबाइल और फोबिया मतलब डर....नोमोफोबिया यानि मोबाइल ना होने की कल्पना मात्र से डर....हो सकता है कि आपके जीवन में नोमोफोबिया दस्तक दे रहा हो और इसका असर आपके कामकाज और बाकी जीवन पर पड़ रहा हो.... लेकिन आप उसे इग्नोर कर रहे हैं... फोन के बिना अब जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती.....फोन में सबकुछ है...लेकिन दोस्तों फोन में जिंदगी नहीं है...
मोबाइल और आपके बीच एक प्रैक्टिकल रिलेशनशिप है, जिसमें आप जाने अनजाने एक ओवर डिपेंडेंस डेवलप कर रहे हैं....इससे आपके मोबाइल यूज का एक पैटर्न बन गया है...आपका दिमाग इस पैटर्न का आदी हो चुका है....और ये पैटर्न टूटने पर आपको दिक्कत महसूस होती है..... कोई टोक दे कि मोबाइल में ही घुसे रहते हो तो बुरा लगता है....कहा-सुनी हो जाती है....पास में फोन ना हो तो टेंशन होता है...कभी कभी घबराहट होती है...मन में चिड़चिड़ मचती है.......मित्रों ये परेशानियां अगर वक्त रहते दूर नहीं की गईं तो एक स्टेज के बाद नोमोफोबिया घर कर लेता है....नोमोफोबिया के कुछ सिम्पट्म्स होते हैं जिन्हें आप आसानी से शुरुआत में ही पकड़ सकते हैं.....मसलन....मोबाइल फोन छूट जाए तो घबराहट चालू, धड़कनें तेज हो जाए, कंपकपी और पसीना आ जाए, दिल बैठने लगे, भ्रम और बेचैनी का एहसास होने लगे
By Manoj Srivastava। TV host । Centristनोमो यानी नो मोबाइल और फोबिया मतलब डर....नोमोफोबिया यानि मोबाइल ना होने की कल्पना मात्र से डर....हो सकता है कि आपके जीवन में नोमोफोबिया दस्तक दे रहा हो और इसका असर आपके कामकाज और बाकी जीवन पर पड़ रहा हो.... लेकिन आप उसे इग्नोर कर रहे हैं... फोन के बिना अब जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती.....फोन में सबकुछ है...लेकिन दोस्तों फोन में जिंदगी नहीं है...
मोबाइल और आपके बीच एक प्रैक्टिकल रिलेशनशिप है, जिसमें आप जाने अनजाने एक ओवर डिपेंडेंस डेवलप कर रहे हैं....इससे आपके मोबाइल यूज का एक पैटर्न बन गया है...आपका दिमाग इस पैटर्न का आदी हो चुका है....और ये पैटर्न टूटने पर आपको दिक्कत महसूस होती है..... कोई टोक दे कि मोबाइल में ही घुसे रहते हो तो बुरा लगता है....कहा-सुनी हो जाती है....पास में फोन ना हो तो टेंशन होता है...कभी कभी घबराहट होती है...मन में चिड़चिड़ मचती है.......मित्रों ये परेशानियां अगर वक्त रहते दूर नहीं की गईं तो एक स्टेज के बाद नोमोफोबिया घर कर लेता है....नोमोफोबिया के कुछ सिम्पट्म्स होते हैं जिन्हें आप आसानी से शुरुआत में ही पकड़ सकते हैं.....मसलन....मोबाइल फोन छूट जाए तो घबराहट चालू, धड़कनें तेज हो जाए, कंपकपी और पसीना आ जाए, दिल बैठने लगे, भ्रम और बेचैनी का एहसास होने लगे