पुत्रकामेष्टि यज्ञ की दो कथाएँ हमारे महाकाव्यों में मिलती हैं, पहली कथा त्रेता युग की है, दुसरी द्वापर युग की।इन दो कथाओं को एक साथ देखेंगे तो मंशा(intention) का महत्व सहज रूप से समझ आ जाएगा।
पुत्रकामेष्टि यज्ञ की दो कथाएँ हमारे महाकाव्यों में मिलती हैं, पहली कथा त्रेता युग की है, दुसरी द्वापर युग की।इन दो कथाओं को एक साथ देखेंगे तो मंशा(intention) का महत्व सहज रूप से समझ आ जाएगा।