कई बार तथकथित नायक(नेता) अपने ढोंग में इतने सफल हो जाते हैं कि वास्तविक से ज़्यादा वास्तविक वे ही जान पड़ते हैं मगर जब दायित्वों का भार उठाना पड़ता है तब वे बोझ से दबते हुए खत्म हो जाते हैं या रण छोड़ कर भाग जाते हैं...
कई बार तथकथित नायक(नेता) अपने ढोंग में इतने सफल हो जाते हैं कि वास्तविक से ज़्यादा वास्तविक वे ही जान पड़ते हैं मगर जब दायित्वों का भार उठाना पड़ता है तब वे बोझ से दबते हुए खत्म हो जाते हैं या रण छोड़ कर भाग जाते हैं...