जंगल केवल पेड़ों का झुंड नही होता वह करोड़ों जीवों घर होता है, जहां सारे जीव सह अस्तित्व को समझते हुए एक साथ निवास करते हैं, फिर एक दिन मनुष्य अपने भोग की भूख के साथ आता है और सबकुछ केवल अपने लिए समेट लेना चाहता है...
जंगल केवल पेड़ों का झुंड नही होता वह करोड़ों जीवों घर होता है, जहां सारे जीव सह अस्तित्व को समझते हुए एक साथ निवास करते हैं, फिर एक दिन मनुष्य अपने भोग की भूख के साथ आता है और सबकुछ केवल अपने लिए समेट लेना चाहता है...