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ये एक विडंबना है कि भारत जैसे देश में जहाँ कामसूत्र की अवधारणा रची गई और प्रेम की भाषा को खजुराहो, दिलवाड़ा, अजंता और एलोरा के पत्थरों पर उकेरा गया, वहीं लोग प्रेम संवाद और रिझाने की कला भूलते जा रहे हैं.
By wobsibaये एक विडंबना है कि भारत जैसे देश में जहाँ कामसूत्र की अवधारणा रची गई और प्रेम की भाषा को खजुराहो, दिलवाड़ा, अजंता और एलोरा के पत्थरों पर उकेरा गया, वहीं लोग प्रेम संवाद और रिझाने की कला भूलते जा रहे हैं.