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गहराई सी थी उसकी बातों में आज,
हिचकिचाते हुए उसने आज जो बयान कर दी
एक मुद्दत से दिल में जो प्यार दबा रखा था
आँखों में कुछ हैरानियों के साथ आज छलक उठा।
कह रही थी अगर मना नहीं पाई तो शायद जी न पाऊँगी
हाथों में हाथ उसने कभी पकड़ा ही नहीं।
कहीं छू लिया होता अगर गलती से कुछ रोज़ पहले,
इतने सालों की दबी मोहब्बत को एक महफूज़ ठिकाना मिल चुका होता।
- मनोज भारती ♥️
By ❤️गहराई सी थी उसकी बातों में आज,
हिचकिचाते हुए उसने आज जो बयान कर दी
एक मुद्दत से दिल में जो प्यार दबा रखा था
आँखों में कुछ हैरानियों के साथ आज छलक उठा।
कह रही थी अगर मना नहीं पाई तो शायद जी न पाऊँगी
हाथों में हाथ उसने कभी पकड़ा ही नहीं।
कहीं छू लिया होता अगर गलती से कुछ रोज़ पहले,
इतने सालों की दबी मोहब्बत को एक महफूज़ ठिकाना मिल चुका होता।
- मनोज भारती ♥️