https://youtu.be/vBWZcRJQamA गिल्लू संस्मरण के माध्यम से महादेवी ने जीव - जन्तुओं की समझ और संवेदना को अभिव्यजित किया है । गिल्लू ( गिलहरी ) का लेखिका के प्रत्येक कार्य के प्रति व्यवहार यह अनुभूति कराता है कि मौन अभिव्यक्ति को समझने के लिए मन को एकाकार करना अपरिहार्य है । इसी कारण गिल्लू की सूक्ष्म संवेदना को लेखिका ने अनुभव किया । इस सस्मरण के माध्यम से लेखिका आधुनिकता और भौतिकवाद से संवेदना शून्य मन को द्रवित कर संवेदनशील बनाने में सहायक है ।